हिंदू विरोधी होने के आरोप के बाद वॉशिंगटन के मंदिर में गायक का कार्यक्रम रद्द

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हाइलाइट्स
कर्नाटक शैली के गायक टीएम कृष्णा का वॉशिंगटन के मंदिर में कार्यक्रम रद्द कर दिया गया
कृष्णा अहसिष्णुता के खिलाफ मुखर रहते हैं और इस कारण सोशल मीडिया पर कई बार ट्रोल भी हो चुके हैं
कर्नाटक शैली में ईसाई स्तुति गान को लेकर आलोचक उन्हें ‘हिंदूविरोधी’ बोल रहे हैं
आयोजकों ने कहा कि यह घटना दुखद है, कलाकारों को कला प्रदर्शन के लिएमंच मिलना चाहिए
वॉशिंगटन । भारत में उदार प्रगतिशील और कट्टर सिद्धांतवादियों के बीच का विवाद अब बढ़कर अमेरिका + तक पहुंच गया है। कर्नाटक शैली के मशहूर गायक टीएम कृष्णा को वॉशिंगटन के एक मंदिर में होनेवाले कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा। कृष्णा पर ‘हिंदू विरोधी’ होने के आरोप लगते रहे हैं। कृष्णा संगीत के साथ मुखर तौर पर

हाइलाइट्स
कर्नाटक शैली के गायक टीएम कृष्णा का वॉशिंगटन के मंदिर में कार्यक्रम रद्द कर दिया गया
कृष्णा अहसिष्णुता के खिलाफ मुखर रहते हैं और इस कारण सोशल मीडिया पर कई बार ट्रोल भी हो चुके हैं
कर्नाटक शैली में ईसाई स्तुति गान को लेकर आलोचक उन्हें ‘हिंदूविरोधी’ बोल रहे हैं
आयोजकों ने कहा कि यह घटना दुखद है, कलाकारों को कला प्रदर्शन के लिएमंच मिलना चाहिए
वॉशिंगटन : भारत में उदार प्रगतिशील और कट्टर सिद्धांतवादियों के बीच का विवाद अब बढ़कर अमेरिका + तक पहुंच गया है। कर्नाटक शैली के मशहूर गायक टीएम कृष्णा को वॉशिंगटन के एक मंदिर में होनेवाले कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा। कृष्णा पर ‘हिंदू विरोधी’ होने के आरोप लगते रहे हैं। कृष्णा संगीत के साथ मुखर तौर पर

अमेरिका में 9 सितंबर को स्थानीय मंदिर में उनका गायन कार्यक्रम होना था। हालांकि, कुछ लोगों ने इसका जमकर विरोध किया, जिसके बाद कार्यक्रम का वेन्यू चेंज करना। कृष्णा के आलोचकों का कहना है कि उन्होंने कर्नाटक + संगीत के स्वरूप को विकृत किया है और इसमें ईसाई प्रभाव वाले तत्वों को शामिल किया है।

विवाद बढ़ने के बाद श्री शिव-विष्णु मंदिर की जगह पर कृष्णा का कार्यक्रम वॉशिंगटन + (डीसी) के बाहर जॉर्जगेटाउन यूनिवर्सिटी में शिफ्ट कर दिया गया। इस कार्यक्रम के आयोजकों में से एक श्रीकांत कुनिकृष्णन ने कहा, ‘कलाकारों को अपनी कला के प्रदर्शन के लिए मंच मिलना चाहिए। इस कार्यक्रम का उद्देश्य था कि कर्नाटक संगीत में दिलचस्पी रखनेवालों को एक अच्छी संगीतमय शाम मिल सके।’

बता दें कि पिछले महीने कुछ हिंदू कट्टरवादी समूहों ने कर्नाटक संगीत के गायक नित्यश्री महादेवन और ओएस अरुण को ईसाई धर्म के प्रार्थना गीत को कर्नाटक संगीत में गाया था। कृष्णा की पहचान भी अभिव्यक्ति की आजादी के समर्थकों के तौर पर है। इस विवाद के बाद कृष्णा ने कहा था कि भारत की राजनीतिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों में असहिष्णुता बढ़ रहा है और मैं इसके खिलाफ हूं। कृष्णा ने कहा था, ‘मैं हर महीने जीसस क्राइस्ट और अल्लाह के लिए भी कर्नाटक संगीत के अनुसार कुछ गीत गाऊंगा। मुझे जैसी धमकियां और अभद्र भाषा में संदेश मिल रहे हैं, उनका जवाब देने के लिए मैंने यह तरीका अपनाया है।’

अमेरिका में 9 सितंबर को स्थानीय मंदिर में उनका गायन कार्यक्रम होना था। हालांकि, कुछ लोगों ने इसका जमकर विरोध किया, जिसके बाद कार्यक्रम का वेन्यू चेंज करना। कृष्णा के आलोचकों का कहना है कि उन्होंने कर्नाटक + संगीत के स्वरूप को विकृत किया है और इसमें ईसाई प्रभाव वाले तत्वों को शामिल किया है।

विवाद बढ़ने के बाद श्री शिव-विष्णु मंदिर की जगह पर कृष्णा का कार्यक्रम वॉशिंगटन + (डीसी) के बाहर जॉर्जगेटाउन यूनिवर्सिटी में शिफ्ट कर दिया गया। इस कार्यक्रम के आयोजकों में से एक श्रीकांत कुनिकृष्णन ने कहा, ‘कलाकारों को अपनी कला के प्रदर्शन के लिए मंच मिलना चाहिए। इस कार्यक्रम का उद्देश्य था कि कर्नाटक संगीत में दिलचस्पी रखनेवालों को एक अच्छी संगीतमय शाम मिल सके।’

बता दें कि पिछले महीने कुछ हिंदू कट्टरवादी समूहों ने कर्नाटक संगीत के गायक नित्यश्री महादेवन और ओएस अरुण को ईसाई धर्म के प्रार्थना गीत को कर्नाटक संगीत में गाया था। कृष्णा की पहचान भी अभिव्यक्ति की आजादी के समर्थकों के तौर पर है। इस विवाद के बाद कृष्णा ने कहा था कि भारत की राजनीतिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों में असहिष्णुता बढ़ रहा है और मैं इसके खिलाफ हूं। कृष्णा ने कहा था, ‘मैं हर महीने जीसस क्राइस्ट और अल्लाह के लिए भी कर्नाटक संगीत के अनुसार कुछ गीत गाऊंगा। मुझे जैसी धमकियां और अभद्र भाषा में संदेश मिल रहे हैं, उनका जवाब देने के लिए मैंने यह तरीका अपनाया है।’

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